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एमक्यू-9 रीपर ड्रोन

यह एमक्यू-9 रीपर ड्रोन इस बार दो बार दुश्मनों के हमलों में मार गिराया जा चुका है। खुद अमेरिकी वायु सेना इसे 2035 तक अपने बेड़े से रिटायर करने के प्लान पर काम कर रही है।

वॉशिंगटन: भारत अपनी थल सेना और नौसेना के लिए अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीद रहा है। हाल में ही टू प्लस टू वार्ता के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के सौदे को लेकर भी बातचीत हुई थी। लद्दाख में चीन के साथ जारी गतिरोध को देखते हुए भारत को इस ड्रोन की बेहद सख्त जरूरत है।

भारतीय नौसेना पहले से ही एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की दो यूनिट को आपरेट कर रही है। लद्दाख गतिरोध के बाद से ये ड्रोन चीन सीमा के करीब भी उड़ान भर रहे हैं। इनके मिशनों ने भारतीय सेना को कई महत्वपूर्ण जानकारियां और ताजा हालात की अपडेट प्रदान की है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मध्य पूर्व में टेररिस्ट हंटर के रूप में ख्याति प्राप्त की है। लेकिन, एमक्यू-9 रीपर को हाल में मार गिराने की घटनाओं ने इसके संचालन की प्रासंगिकता के बारे में सवाल सामने ला दिया है।

एमक्यू-9 रीपर इतना शक्तिशाली क्यों

यह सवाल भारत के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपनी सेनाओं के लिए एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की खरीद पर काम कर रहा है, जबकि अमेरिकी वायु सेना इसे रिटायर करने की तैयारी में है। ऐसे में भविष्य के युद्धों में एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की उत्तरजीविता पर सवाल उठ रहा है।

अमेरिकी वायु सेना का इरादा 2035 तक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को चरणबद्ध तरीके से हटाने का है। अमेरिकी वायु सेना एमक्यू-9 रीपर को रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट या आरपीए कहती है। एक रीपर लगभग A-10 थंडरबोल्ट II जितना विशाल होता है। यह 3,750 पाउंड के हथियारों (आठ हेलफायर मिसाइलों) को ले जा सकता है और बिना ईंधन भरे लगभग 2,000 मील की दूरी तय कर सकता है।

हजारों मील दूर से ऑपरेट हो सकता है एमक्यू-9 रीपर

यह दुनिया भर में घूम सकता है जबकि इसका ऑपरेटर हजारों मील दूर बैठा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एमक्यू-9 रीपर कमांड सेंटर से उपग्रह से जुड़ा हुआ होता है। एमक्यू-9 रीपर में स्टील्थ फीचर की कमी है, लेकिन पायलट रणनीति से उसकी भरपाई कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय विशेषज्ञ एमक्यू-9 रीपर को हाल में हुए नुकसान को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

यूरेशियन टाइम्स से बात करते हुए रिटायर्ड वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि ड्रोन की इस श्रेणी में एमक्यू-9 सबसे अच्छा है। किसी भी सैन्य मंच को खरीदने के मानदंड को हमारे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और जिस प्रतिद्वंद्वी का हमें सामना करना पड़ सकता है, उसमें देखा जाना चाहिए।

रीपर की खरीद से लड़ाकू विमानों को मिलेगी ताकत

भारत ने पहले ही एमक्यू-9बी सी गार्जियन (हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस) के लिए अनुरोध पत्र (एलओआर) बढ़ा दिया है और अब अमेरिका से प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग के माध्यम से 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे के तहत 31 ड्रोन खरीदने का सौदा 10 नवंबर को भारत और अमेरिका के बीच 2+2 वार्ता के दौरान हुआ।

भारतीय नौसेना हिंद महासागर में चीनी गतिविधि पर नजर रखने के लिए इन ड्रोनों का संचालन करती है। भारत के किसी भी फ्रंटलाइन फाइटर जेट को एक ही मिशन में कई बार ईंधन भरना होगा, लेकिन रीपर उन लंबी उड़ानों को आसानी से बिना फ्यूल भरे पूरा कर सकता है और लड़ाकू विमानों को उनकी उड़ान सीमा के लिए अधिक उपयुक्त अन्य कार्यों के लिए मुक्त कर सकता है।

रिमोटली ऑपरेट होना सबसे बड़ी ताकत

एमक्यू-9 रीपर का रिमोटली पायलट होना भी इसका सबसे प्रभावी फीचर है। एक रीपर ड्रोन एक ऑपरेटर के नियंत्रण में रहने के तुलना में अधिक समय तक आसमान में मंडरा सकता है। एक पायलट अधिकतम 8 घंटे की शिफ्ट में ही विमान को उड़ा सकता है, हालांकि प्रेक्टिकल यह संभव नहीं है, क्योंकि इससे लड़ाकू विमान का इंजन ज्यादा गर्म होकर बंद पड़ सकता है। वहीं, रीपर ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 24 घंटे तक एक लक्ष्य के ऊपर उड़ान भर सकता है। इसके लिए बस इसके ऑपरेटर को बदलने की जरूरत है।

भारत के लिए MQ-9 ड्रोन कितना फायदेमंद, इस साल दो बार मार गिराया गया, अमेरिका भी हटा रहा।

अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की खरीद को लेकर भारत के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं। यह ड्रोन इस बार दो बार दुश्मनों के हमलों में मार गिराया जा चुका है। खुद अमेरिकी वायु सेना इसे 2035 तक अपने बेड़े से रिटायर करने के प्लान पर काम कर रही है।

भारत अपनी थल सेना और नौसेना के लिए अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन खरीद रहा है। हाल में ही टू प्लस टू वार्ता के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन के सौदे को लेकर भी बातचीत हुई थी। लद्दाख में चीन के साथ जारी गतिरोध को देखते हुए भारत को इस ड्रोन की बेहद सख्त जरूरत है।

भारतीय नौसेना पहले से ही एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की दो यूनिट को आपरेट कर रही है। लद्दाख गतिरोध के बाद से ये ड्रोन चीन सीमा के करीब भी उड़ान भर रहे हैं। इनके मिशनों ने भारतीय सेना को कई महत्वपूर्ण जानकारियां और ताजा हालात की अपडेट प्रदान की है। एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को मध्य पूर्व में टेररिस्ट हंटर के रूप में ख्याति प्राप्त की है। लेकिन, एमक्यू-9 रीपर को हाल में मार गिराने की घटनाओं ने इसके संचालन की प्रासंगिकता के बारे में सवाल सामने ला दिया है।

एमक्यू-9 रीपर इतना शक्तिशाली क्यों

यह सवाल भारत के लिए अधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह अपनी सेनाओं के लिए एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की खरीद पर काम कर रहा है, जबकि अमेरिकी वायु सेना इसे रिटायर करने की तैयारी में है। ऐसे में भविष्य के युद्धों में एमक्यू-9 रीपर ड्रोन की उत्तरजीविता पर सवाल उठ रहा है।

अमेरिकी वायु सेना का इरादा 2035 तक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन को चरणबद्ध तरीके से हटाने का है। अमेरिकी वायु सेना एमक्यू-9 रीपर को रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट या आरपीए कहती है। एक रीपर लगभग A-10 थंडरबोल्ट II जितना विशाल होता है। यह 3,750 पाउंड के हथियारों (आठ हेलफायर मिसाइलों) को ले जा सकता है और बिना ईंधन भरे लगभग 2,000 मील की दूरी तय कर सकता है।

एमक्यू-9 रीपर ड्रोन
एमक्यू-9 रीपर ड्रोन

हजारों मील दूर से ऑपरेट हो सकता है एमक्यू-9 रीपर

यह दुनिया भर में घूम सकता है जबकि इसका ऑपरेटर हजारों मील दूर बैठा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एमक्यू-9 रीपर कमांड सेंटर से उपग्रह से जुड़ा हुआ होता है। एमक्यू-9 रीपर में स्टील्थ फीचर की कमी है, लेकिन पायलट रणनीति से उसकी भरपाई कर सकते हैं।

हालांकि, भारतीय विशेषज्ञ एमक्यू-9 रीपर को हाल में हुए नुकसान को ज्यादा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यूरेशियन टाइम्स से बात करते हुए रिटायर्ड वाइस एडमिरल शेखर सिन्हा ने कहा कि ड्रोन की इस श्रेणी में एमक्यू-9 सबसे अच्छा है। किसी भी सैन्य मंच को खरीदने के मानदंड को हमारे संदर्भ में देखा जाना चाहिए और जिस प्रतिद्वंद्वी का हमें सामना करना पड़ सकता है, उसमें देखा जाना चाहिए।

भारतीय वायु सेना ने शांतिकाल में दुर्घटनाओं में कई लड़ाकू विमान खो दिए। तो क्या हमने उन्हें खरीदना बंद कर दिया?

रीपर की खरीद से लड़ाकू विमानों को मिलेगी ताकत

भारत ने पहले ही एमक्यू-9बी सी गार्जियन (हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस) के लिए अनुरोध पत्र (एलओआर) बढ़ा दिया है और अब अमेरिका से प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। विदेशी सैन्य बिक्री मार्ग के माध्यम से 3 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे के तहत 31 ड्रोन खरीदने का सौदा 10 नवंबर को भारत और अमेरिका के बीच 2+2 वार्ता के दौरान हुआ।

भारतीय नौसेना हिंद महासागर में चीनी गतिविधि पर नजर रखने के लिए इन ड्रोनों का संचालन करती है। भारत के किसी भी फ्रंटलाइन फाइटर जेट को एक ही मिशन में कई बार ईंधन भरना होगा, लेकिन रीपर उन लंबी उड़ानों को आसानी से बिना फ्यूल भरे पूरा कर सकता है और लड़ाकू विमानों को उनकी उड़ान सीमा के लिए अधिक उपयुक्त अन्य कार्यों के लिए मुक्त कर सकता है।

रिमोटली ऑपरेट होना सबसे बड़ी ताकत

एमक्यू-9 रीपर का रिमोटली पायलट होना भी इसका सबसे प्रभावी फीचर है। एक रीपर ड्रोन एक ऑपरेटर के नियंत्रण में रहने के तुलना में अधिक समय तक आसमान में मंडरा सकता है। एक पायलट अधिकतम 8 घंटे की शिफ्ट में ही विमान को उड़ा सकता है, हालांकि प्रेक्टिकल यह संभव नहीं है,

क्योंकि इससे लड़ाकू विमान का इंजन ज्यादा गर्म होकर बंद पड़ सकता है। वहीं, रीपर ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 24 घंटे तक एक लक्ष्य के ऊपर उड़ान भर सकता है। इसके लिए बस इसके ऑपरेटर को बदलने की जरूरत होगी।

जब तक स्वदेशी उपग्रह प्रौद्योगिकियां अमेरिका के स्तर तक नहीं पहुँचती हैं और हमारी निगरानी प्रणालियां हर मौसम और लंबी दूरी की नहीं होती हैं – ये ड्रोन शायद सबसे विश्वसनीय और सबसे अच्छी संपत्ति हैं – विशेष रूप से नौसेना के लिए।

रिटायर्ड वाइस एडमिरल एबी सिंह

हिंद महासागर की निगरानी भारत के बेहद जरूरी

रिटायर्ड वाइस एडमिरल एबी सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना के लिए हिंद महासागर के विशाल क्षेत्रों को 24×7 निगरानी में रखना आवश्यक है। ये भारतीय नौसेना के समग्र निगरानी योजना का समर्थन करने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंन यह भी कहा कि इसके अलावा, कल्पना कीजिए कि क्या कारगिल युग में सेना या भारतीय वायुसेना के पास भी ये थे।

अगर ये होते तो दुश्मन पर निशाना साधना बहुत आसान होता, और बिल्ड-अप का पहले ही पता लगा लिया गया होता। उनके अनुसार यह अगले कुछ वर्षों के लिए सही विकल्प है।”.

हिंद महासागर की अनदेखी से भारत के हितों को खतरा

भारतीय नौसेना के पूर्व कैप्टन डीके शर्मा इस आकलन से सहमत हैं। उनका तर्क है कि पूरे हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) को मानवयुक्त प्लेटफार्मों या उपग्रहों के साथ चौबीसों घंटे निगरानी में रखना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में कई भी अनदेखी हमारे हित के लिए हानिकारक होंगी और चौथी या पांचवीं सबसे शक्तिशाली नौसेना के रूप में हमारी क्षमताओं पर संदेह पैदा करेगी।

जहां तक एमक्यू9बी की उत्तरजीविता के बारे में आपके प्रश्न का सवाल है, तो यह एक निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है, और इसमें घंटों के हिसाब से प्रगति होगी। अगर किसी चीज को लेकर शिकायते हैं, तो उसके लाभ भी हैं, और यह प्रक्रिया अंतहीन या निरंतर विकसित होती रहती है।

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