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मिजोरम सीमा पर म्यांमार

हमारी मिजोरम सीमा पर लड़ाई पसंद नहीं, इसे रोक लो; चिंतित भारत की म्यांमार को दो टूक, मिजोरम सीमा के पास म्यांमार विरोधी जुंटा समूहों के बीच लड़ाई से भारत गहरी चिंता में है

म्यांमार में जुंटा विरोधी समूहों और सेना के बीच लंबे समय से चल रही लड़ाई भीषण हो चुकी है। भारत इस लड़ाई को लेकर बेहद चिंतित है। भारत ने गुरुवार को म्यांमार के जुंटा विरोधी समूहों और सरकारी बलों के बीच लड़ाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

यह लड़ाई भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम से लगती देश की सीमा के करीब चल रही है। इसके परिणामस्वरूप म्यांमार के नागरिकों को मिजोरम में शरण लेनी पड़ी है। भारत ने हिंसा को रोकने और बातचीत करने पर जोर दिया है।

रिहखावदार पर विरोधी समूहों का कब्जा

जुंटा विरोधी समूहों के बढ़ते हमले के कारण विद्रोही सेनानियों ने मिजोरम की सीमा के पास प्रमुख शहरों, सैन्य ठिकानों और व्यापार मार्गों पर कब्जा कर लिया है।

म्यांमार में जातीय सशस्त्र संगठन चिन नेशनल आर्मी (सीएनए) ने अपने देश की सेना के साथ युद्ध में सीमावर्ती शहर रिहखावदार पर पूर्ण नियंत्रण ले लिया है। सीएनए ने चिन राज्य के फलम टाउनशिप में स्थित एक उपनगर रिहखावदार पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करते हुए, भारत-म्यांमार सीमा पर अपना झंडा फहराया है। बता दें कि रिहखावदार भारत-म्यांमार के बीच केवल दो आधिकारिक भूमि सीमा बिंदुओं में से एक है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पड़ोसी देश में हालिया लड़ाई पर सवालों के जवाब देते हुए नियमित मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हम म्यांमार में शांति, स्थिरता और लोकतंत्र की वापसी के लिए अपना आह्वान दोहराते हैं। भारत-म्यांमार सीमा पर जोखावथार के सामने, चिन राज्य में रिहखावदार क्षेत्र में लड़ाई हुई।

इसके कारण म्यांमार के नागरिकों की भारतीय सीमा में आवाजाही हुई है। हम अपनी सीमा के नजदीक ऐसी घटनाओं से बेहद चिंतित हैं।”

भारत में घुसे हजारों लोग

बता दें कि म्यांमार के चिन राज्य में भीषण लड़ाई के चलते हवाई हमलों के बाद मिजोरम की अंतरराष्ट्रीय सीमा से करीब दो हजार लोग भारत आए। तीन दिन पहले मिजोरम के चम्फाई जिले के उपायुक्त (डीसी) जेम्स लालरिंछना ने पीटीआई को बताया था कि म्यांमार में सत्तारूढ़ जुंटा समर्थित सुरक्षा बलों और मिलिशिया समूह ‘पीपुल्स डिफेंस फोर्स’ (पीडीएफ) के बीच रविवार शाम को भीषण गोलीबारी हुई। चम्फाई जिले की सीमा पड़ोसी देश के चिन राज्य से लगती है।

लालरिंछना ने कहा कि चिन के खावमावी, रिहखावदार और पड़ोसी गांवों के 2,000 से अधिक लोग गोलीबारी के कारण भारत आ गए और चम्फाई जिले के ज़ोखावथर में शरण ली। उन्होंने कहा कि मिलिशिया ने म्यांमार के रिहखावदार में स्थित सैन्य अड्डे पर सोमवार तड़के और खावमावी के अड्डे पर दोपहर में कब्जा कर लिया।

डीसी ने कहा कि जवाबी कार्रवाई में म्यांमा की सेना ने सोमवार को खावमावी और रिहखावदार गांवों पर हवाई हमले किए। लालमुआनपुइया ने कहा कि गोलीबारी शुरू होने से पहले ही म्यांमार के 6,000 से अधिक लोग जोखावथर में रह रहे हैं।

5,000 नागरिकों को मिजोरम में शरण लेनी पड़ी

विद्रोही सेनानियों के एक समूह ने कई घंटों की लड़ाई के बाद सोमवार को रिख्वादर में दो सैन्य शिविरों पर नियंत्रण कर लिया था। लड़ाई के परिणामस्वरूप 40 से अधिक सैनिकों सहित लगभग 5,000 म्यांमार नागरिकों को मिजोरम में शरण लेनी पड़ी।

सैनिकों को भारतीय सीमा से दूसरी सीमा पर ले जाया गया और वापस भेज दिया गया। गुरुवार को, ताजा रिपोर्टें आईं कि म्यांमार के कम से कम 29 और सैनिक अपने बेस पर विद्रोही सेनानियों के हमले से बचने के लिए भारत में घुस आए। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि पिछले महीने से तेज हुई लड़ाई के कारण लगभग 90,000 लोग विस्थापित हुए हैं।

बागची ने कहा कि म्यांमार की स्थिति पर भारत की स्थिति “बहुत स्पष्ट है। हम हिंसा की समाप्ति और रचनात्मक बातचीत के माध्यम से स्थिति का समाधान चाहते हैं”। उन्होंने कहा, “2021 में म्यांमार में मौजूदा संघर्ष शुरू होने के बाद से पड़ोसी देश से बड़ी संख्या में नागरिकों ने भारत में शरण ली है।

मिजोरम सीमा पर म्यांमार
मिजोरम सीमा पर म्यांमार

संबंधित पड़ोसी राज्यों में स्थानीय अधिकारी मानवीय आधार पर स्थिति को उचित रूप से संभाल रहे हैं। हम उन लोगों की वापसी की भी सुविधा दे रहे हैं जो म्यांमार वापस जाना चाहते हैं।” बागची ने म्यांमार के उन नागरिकों की संख्या के बारे में विवरण नहीं दिया जो सीमा पार करके भारत आ गए हैं, हालांकि रिपोर्टों में कहा गया है कि उनमें से हजारों ने भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में शरण मांगी है। 

बागची ने कहा कि वह इस दावे से सहमत नहीं हैं कि भारत जुंटा (म्यांमार की सैन्य सरकार) का समर्थन कर रहा है। उन्होंने कहा, ”विभिन्न मुद्दों पर उनके साथ हमारा सहयोग है, यह एक पड़ोसी देश है। हम जो भी कदम उठाते हैं वह अपने हितों को ध्यान में रखकर करते हैं, हम निश्चित रूप से अपनी जिम्मेदारियों से अवगत हैं और हम इसमें सभी कारकों को ध्यान में रखते हैं।”

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